• By Satyam Prajapati
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  • पुस्तक समीक्षा
  • 28 Sep, 2026

‘जहरीला बहुमत : जब बहुमत बना विनाश का हथियार’ पुस्तक का विमोचन

लखनऊ में लेखक देवेन्द्र प्रताप यादव की पुस्तक ‘जहरीला बहुमत : जब बहुमत बना विनाश का हथियार’ का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में लोकतंत्र, बहुमत, असहमति, सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

 

लखनऊ। कैफी आज़मी सभागार, पेपर मिल कॉलोनी, निशातगंज में लेखक देवेन्द्र प्रताप यादव की पुस्तक ‘जहरीला बहुमत : जब बहुमत बना विनाश का हथियार’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बहुमत की भूमिका, उसके सामाजिक प्रभाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति, अधिकार तथा सामाजिक न्याय के महत्व पर विचार रखे।
शोभा अक्षर ने कहा कि केवल संख्या में अधिक होना किसी व्यवस्था को न्यायपूर्ण नहीं बनाता। जब बहुमत अल्पमत की आवाज और अधिकारों को दबाने लगे, तब उसके स्वरूप पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पूर्व आईपीएस डॉ. बी. पी. अशोक ने कहा कि लोकतंत्र केवल बहुमत से नहीं चलता, बल्कि अधिकारों, न्याय और असहमति के सम्मान से उसकी सार्थकता तय होती है।

नेशनल जनमत के संपादक नीरज पटेल ने पुस्तक को बहुमत, जनमत और सामाजिक चेतना से जुड़े सवालों पर संवाद की एक पहल बताया और स्वतंत्र व तथ्यपरक चर्चा की जरूरत पर जोर दिया।

चन्द्रभूषण ने कहा कि बहुमत का प्रभाव राजनीति के साथ-साथ समाज, संस्थाओं और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ता है।

डॉ. संदीप यादव ने बहुमत की राजनीति को वैश्विक संदर्भ में रखते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

राजीव यादव ने कहा कि बहुमत को केवल उसकी संख्या से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और फैसलों के आधार पर भी समझना चाहिए।

पूर्व अधिशासी अभियंता भीमराज ने लेखक के वैचारिक प्रयास की सराहना करते हुए सामाजिक असमानता, भेदभाव और वर्चस्व के सवालों पर निरंतर संवाद की जरूरत बताई।

स्पीच पब्लिकेशंस के डायरेक्टर सत्यम प्रजापति ने राजनीति में लोकप्रियता और नेतृत्व के बदलते स्वरूप पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाज को यह तय करना होगा कि वह जननेता चुन रहा है या केवल लोकप्रिय चेहरा।

डॉ. सुविधा वत्स ने पुस्तक को समाज का आईना बताते हुए लेखक के प्रयास और साहस की सराहना की।

कार्यक्रम में राजू यादव, रामसिंह यादव, राजकुमार, डॉ. गणेश सेठ, डॉ. सरिता, राजीव जी और राम लगन यादव ने भी अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में करीब 100 से अधिक साहित्यप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने पुस्तक के प्रकाशन और विमोचन का स्वागत किया।
 

पुस्तक परिचय                                                                                                                                   
पुस्तक: ‘जहरीला बहुमत : जब बहुमत बना विनाश का हथियार’                                                          
लेखक: देवेन्द्र प्रताप यादव           
प्रकाशक: स्पीच पब्लिकेशंस